द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने करवाया था मन्दिर की स्थापना

पालीगंज/ दुल्हिन बाजार के उलार गांव में भक्ति व आस्था का ऐतिहासिक केंद्र ओलार्क सूर्य मंदिर का सम्बन्ध द्वापर युग से है। यहां पहुंचने के लिए दुल्हिन बाजार व पालीगंज के बीचोबीच रकसिया गांव के पास पाली पटना मुख्य मार्ग से एक पक्की सड़क जाती है। वही उलार गांव स्थित यह मंदिर सूर्य उपासकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। इस मंदिर का प्रवेश द्वार पूरब व पश्चिम दिशा की ओर है। पश्चिमी द्वार के सामने एक चमत्कारी तालाब है। जिसमें स्नान करनेवालों को कुष्ठ व चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है।

मन्दिर में पूजा करने से लोगो को सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण होती है।

हिन्दु धर्मग्रन्थ शाम्ब पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जाम्बन्ति पुत्र राजा शाम्ब देव् कन्याओं के साथ तालाब में स्नान कर रहे थे। उसी समय महर्षि गर्ग सरोवर के पास से गुजर रहे थे जिन्हें देखने के बावजूद राजा शाम्ब ने उनकी अभिवादन नही किया व युवतियो से अलग तक नही हटे। वही राजा शाम्ब ने महर्षि का उपहास किया जिससे क्रोधित होकर महर्षि गर्ग ने राजा शाम्ब को कुष्ठ रोगी होने का श्राप दे दिया।

घटना की जानकारी पाकर भगवान श्रीकृष्ण को बहुत दुख हुआ। उन्होंने राजा शाम्ब को इस श्राप से मुक्ति के लिए शाकद्वीप से बैद्य व सूर्य उपासक ब्राह्मणों को बुलाकर उपचार के साथ भगवान सूर्य की उपासना करवाया। वही श्रीकृष्ण ने जिन नदियो व तालाबो के किनारे की मिट्टी व जल में गन्धक की मौजूदगी पायी गयी वहा यज्ञ का आयोजन करवाकर अर्क स्थल के रूप में स्थापित किया।

उन अर्क स्थलों में उलार के ओलार्क, उड़ीसा के कोणार्क, देव् के देवार्क, पंडारक के पुण्यार्क, अङ्गरी के औंगार्क, काशी के लोलार्क, कन्दाहा सहरसा के मार्केण्डेयार्क, उत्तराखण्ड कटारमल के कटलार्क, बड़गांव के बालार्क, चंद्रभागा नदी किनारे चानार्क, पंजाब के चिनाव नदी किनारे आदित्यार्क व गुजरात के पुष्पावती नदी किनारे मोढेरार्क शामिल है। तब से हिन्दू धर्म को माननेवाले लोग इन स्थलों पर पूजा अर्चना कर रोगों व ब्याधियो से मुक्ति पा रहे है।

इतिहास के अनुसार मुगल शासक औरंगजेब ने इस स्थान पर बने मंदिर को तोड़वा दिया था। पर भक्तगण टूटे हुुुयेे मंदिर के ऊपर लगे पीपल के पेड़ व जंगलरूपी स्थान में भगवान सूर्य की प्रतिमा की पूजा करते रहे। 1948 में पहुंचे सन्त सद्गुरु अलबेला बाबाजी महाराज ने कठिया बाबा के बगीचा में रहनेवाले सन्त नारायण दास उर्फ़ सुखलु दास के कहने पर पीपल के पेड़ की पूजा किये जिसके प्रभाव से पीपल का पेड़ सुख गया।

उसके बाद अलबेलाजी महाराज ने स्थानीय लोगो के सहयोग से इस स्थान पर सूर्य मंदिर का निर्माण कराया। लोगो को मानना है कि मंदिर के पास बने चमत्कारी सरोवर में स्नान करने से थकावट दूर हो जाती है व चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है। इसके जल व आस पास के मिटटी की जाँच के दौरान गन्धक की मौजूदगी पायी गयी है।

वही मंदिर के प्रधान पुजारी अवध बिहारी दासजी महाराज ने बतलाया की प्रत्येक रविवार को हजारो श्रद्धालु यहां सरोवर में स्नान कर मंदिर में स्थापित भगवान सूर्य की प्रतिमा को दूध से अभिषेक कराते है। छठ पूजा के अवसर पर राज्य व देश के बिभिन्न क्षेत्रो से लाखो श्रद्धालू पुुजा करने आते है।

श्रद्धालुओं व ब्रतियो की सुविधाओं के लिये पूर्व में मंदिर पूजा कमिटी की ओर से ही सभी ब्यवस्था की जाती थी लेकिन वर्ष 2016 में कार्तिक छठ पूजा की ब्यवस्था की जायजा लेने पहुंचे पटना जिला विकास आयुक्त अमरेंद्र कुमार ने बिहार सरकार की ओर से पांच लाख की राशि उपलब्ध कराई थी। तब से छठ पर्व के अवसर पर आयोजित होनेवाली उलार महोत्सव को संचालन के लिए सरकार की ओर से भी आर्थिक सहयोग किया जा रहा है। साथ ही इस मंदिर को राष्ट्रीय पञ्चांग से जोड़ा गया है।

पूजा की वर्तमान स्थिति:- कोरोना की संक्रमण को देखते हुए मन्दिर परिसर व आसपास में नही लगेगी मेला

ओलर्क महाधाम में छठ पूजा की आयोजन को लेकर बीते रविवार को पालीगंज अनुमंडल कार्यालय के सभागार तथा बीते सोमवार को ओलर्क सूर्य मंदिर परिसर में कार्तिक छठ पूजा की आयोजन को लेकर बैठक किया गया। बैठक में सैकड़ो जन प्रतिनिधियों, समाजसेवियों तथा पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता पालीगंज एसडीओ मुकेश कुमार ने किया।

बैठक में सर्वसम्मति से ओलर्क मन्दिर परिसर व आसपास में मेला का आयोजन नही किये जाने का निर्णय लिया गया। मौके पर एसडीओ मुकेश कुमार ने श्रद्धालुओं व भक्तों से घर पर ही छठ पूजा करने का आग्रह किया है। पूछे जाने पर एसडीओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के रिपोर्ट के आधार पर कोरोना को लेकर सरकार की ओर से छठ पूजा का आयोजन व मेला नही लगाने का आदेश दिया गया गया है।

यदि जानकारी के अभाव में कुछ श्रद्धालु तथा भक्त पूजा करने उलार्क महाधाम में चले आते है तो उनके लिए सभी प्रकार की आवश्यक ब्यवस्थाये की जा रही है। उन सभी भक्तों को कोरोना से बचाव के नियमो के दायरे में रहकर पूजा कराई जाएगी। वही मन्दिर के सहायक पुजारी आनन्द बाबा, शोपालजी व कल्याणजी ने बताया कि बुधवार से चार दिवसीय कार्तिक छठ पर्व नहाय खाय के साथ ब्रती शुरू करेंगे जिसका समापन शनिवार को उदयीमान सूर्य के अर्घ्य के साथ करेंगे।

ओलर्क महाधाम में पूजा व मेला के आयोजन पर रोक लगाए जाने से लोगो मे नाराजगी

ओलर्क महाधाम में पहली बार सरकार की ओर से कोरोना को लेकर छठ पूजा व मेला के आयोजन पर लगाये गए है। जिसको लेकर लोगो मे काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय तथा आसपास के लोगो का कहना है कि कुछ ही दिनों पूर्व विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता व कोरोना के नियमो की धज्जियां उड़ाई जा रही थी। मेले से भी अधिक भीड़ सभाओं के दौरान जुट रही थी लेकिन सरकार व प्रशासन चुप रही। आज छठ पूजा व मेले पर रोक लगाई जाना काफी निंदनीय है।

फोटो:- दुल्हिन बाजार के उलार गांव स्थित द्वापरकालीन ओलार्क सूर्य मंदिर।

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