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ये हैं बिहार के दूसरे ‘दशरथ मांझी’ : गांव की गरीबी दूर करने के लिए खोद डाली लंबी नहर

गया : कहते है कि अगर मन से कुछ चाहो और उसे पाने में अपनी कड़ी मेहनत लगा दो तो पुरा कायनात लग जाता है आपके उस कार्य को पूरा करने में। जी हाँ इस बात को सच कर दिखाया है गया के 70 वर्षीय लौंगी भुईयां ने। जिन्होंने नहर का निर्माण कर बारिश के जल को संचय कर सिंचाई के लिए तैयार किया है।
गया जिले से 90 किमी दूर बाँके बाजार प्रखण्ड के लुटुआ पंचायत के कोठीलवा गांव के 70 वर्षीय लौंगी भुईयां ने खुद 30 सालों तक कड़ी मेहनत कर पहाड़ और वर्षा की पानी को संचय कर गांव तक लाने के लिए ठान लिया और वह प्रतिदिन घर से जंगल मे पहुँच कर नहर बनाने में जुट पड़ा। कोठीलवा गांव निवासी लौंगी भुईयां अपने बेटे,बहु और पत्नी के साथ रहता था वन विभाग की खेती पर सिंचाई के अभाव में सिर्फ मक्का व चना की खेती किया करते थे।रोजगार की तलाश में बेटा प्रदेश चला गया चुकी गांव के अधिकतर पुरुष दूसरे प्रदेशों में ही काम करते है। धीरे-धीरे गांव की आधे से ज्यादा की आबादी रोजगार के लिए प्रदेश चला गया इसी बीच लौंगी भुईयां बकरी चराने जंगल गया और तभी उनके मन में ये ख्याल आया की अगर हमारे गांव में भी पानी की समस्या ठीक हो जाए तो खेती में सिंचाई की परेशानी नहीं होगी और लोग खेतो में सभी फसल की पैदावार करने लगेंगे। और गांव के युवा को अपना गांव परिवार को छोड़ कर बहार नहीं जाना पड़ेगा। और फिर लौंगी भुईयां निकल पड़ा एक खोज में की कैसे गांव में पानी को लाया जाया ,और शुरू की एक मुहीम ,वह रोज इस तलाश में घर से निकलते जंगलो में घूमते पहाड़ो पर चढ़ते और थक हार कर घर आ जाते लेकिन फिर भी अपनी तलाश और मंजिल नहीं भूलते ,और फिर नई सूर्य में किरणों के साथ नई उमंगो के साथ और अपने आँखों में बेटा को प्रदेश से वापस बुलाने की आश लिए हुए घर से निकलते और जुट जाते मंजिल को पाने के लिए। फिर एक दिन उन्होंने खोज निकला कि आखिर क्यूँ गांव में पानी नहीं आती। उन्हें पता चला कि वर्षा की जल को जो पहाड़ पर रुक जाया करता था ,और फिर उसे अपने गॉव तक लाने के लिए एक डीपीआर यानी नक्शा तैयार किया उसी नक्शे के अनुसार दिन में जब भी समय मिलता वह नहर बनाने लगा और 30साल बाद उसकी मेहनत रंग लाई और नहर पूरी तरह तैयार हो गया।बारिश के पानी को गॉव में बने तालाब में उसे स्टोर कर दिया जाता है। जिसे सिंचाई के लिए लोग उपयोग में लाने लगे है करीब 3 गॉव के 3000 हजार लोग लाभान्वित होंगे।

70 वर्षीय लौंगी भुईयां

लौंगी भुईयां ने बताया की पत्नी,बहु और बेटा सभी लोग मना करते थे कि बिना मजदूरी वाला काम क्यों कर रहे है वंही के लोग पागल समझने लगे थे कि कुछ नही होने वाला है लेकिन जब आज नहर का काम पूरा हुआ और उसमें पानी आयी तो लौंगी भुइयां की प्रसंशा होने लगी।बताया कि सरकार अगर हमे ट्रैक्टर दे देती तो वह विभाग के बंजर पड़े जमीन को खेती लायक उपजाऊ बनाकर लोग भरण पोषण कर सकते है।
वंही गॉव के ग्रामीण सुखदेव  ने बताया कि सरकार को चाहिए कि लौंगी भुईयां को पेंशन व आवास योजना का लाभ मिल सके ताकि घर की आर्थिक स्थिति में सुधार हो। जो अपने लिए नही बल्कि पूरे कई गॉवो के लिए खुद मेहनत की है।

जयकिशन प्रखंड विकाश पदाधिकारी


इमामगंज प्रखण्ड के प्रखंड विकास पदाधिकारी जय किशन ने बताया की जल संरक्ष्ण व जल संचय करने को लेकर राज्य सरकार भी कार्य कर रही है। वैसे में लौंगी माँझी के जज्बे को सलाम है जो खुद 30 साल में 5फिट चौड़ा और 3 फिट गहरा नहर का निर्माण कर बारिश के जल को संचय कर सिंचाई के लिए उपयुक्त बनाया है।

रिपोर्ट:राकेश कुमार ,गया

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