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पालीगंज के लोकप्रिय किसान नेता डॉ. श्यामनन्दन शर्मा की भाकपा-माले में हुई वापसी

कहा कि भाजपा जैसी संविधानविरोधी फासीवादी ताकतों को वामपंथ ही कर सकता है परास्त

पटना : जिले के पालीगंज इलाके के जाने-माने किसान नेता, वरिष्ठ चिकित्सक और हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. श्यामनन्दन शर्मा आज भाकपा-माले में पुनः शामिल हो गए।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि भाजपा जैसी संविधान विरोधी फासीवादी ताकतों को केवल वामपंथ ही मुकम्मल जवाब दे सकता है. हमारा तजुर्बा कहता है कि देश की आम जनता और किसानों के विकास का एजेंडा सिर्फ लाल झंडे के पास है. उन्होंने किसानों की लगातार हो रही उपेक्षा पर केंद्र व बिहार सरकार को घेरा और कहा कि ये दोनों सरकारें घोर किसान विरोधी हैं. आज पूरा सोन नहर प्रणाली सूखने के कगार पर है, लेकिन भाजपा-जदयू को इससे कोई लेना देना नहीं है. बिहार की बड़ी वामपंथी पार्टी होने के नाते, चाहे भाजपा के फासीवादी हमले से मुकाबले की बात हो या किसानों के अधिकारों के लिए लड़ने का, भाकपा – माले के कंधों पर बड़ी जिम्मेवारी है. उन्होंने कहा कि इस लड़ाई को आगे बढ़ाने में खुद को शामिल करने के लिए ही भाकपा – माले में शामिल हो रहा हूं.इस मौके पर भाकपा – माले के पोलित ब्यूरो सदस्य, पूर्व विधायक व अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड राजाराम सिंह, पार्टी के पूर्व सांसद का. रामेश्वर प्रसाद, और बिहार के चर्चित किसान नेता कॉमरेड केडी यादव भी उपस्थित थे. मौके पर राजाराम सिंह ने कहा कि डॉ. श्यामनन्दन शर्मा फिर से हमारे साथ हैं और हमें उम्मीद है कि बिहार में किसानों को संगठित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
डॉ श्यामनन्दन शर्मा के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1967 में महामाया प्रसाद के नेतृत्व में कांग्रेस विरोधी छात्र आंदोलन में एक प्रखर छात्र नेता के रूप में हुई थी. आंदोलन के दौरान उनकी गिरफ्तारी हुई और उन्हें एक माह टाटा जेल में बिताना पड़ा, जहां वे कम्युनिष्ट विचारधारा से प्रभावित होकर सीपीआई के सदस्य बन गए.1972 में पालीगंज में उन्होंने एक क्लिनिक खोला तथा किसान आंदोलन का नेतृत्व करना आरम्भ किया. वे पटना जिला किसान सभा के अध्यक्ष बनाये गए. 1974 ई० में बिहार सरकार की नौकरी में भी गए लेकिन तुरत ही उसे छोड़कर पुनः पालीगंज आ गये .1975 में जेपी आंदोलन में भाग लिया और आंदोलन के दौरान 3 माह फुलवारी (पटना) के जेल में रहे. उसके बाद सीपीआई (एम) का सदस्य बने.वहाँ भी उन्हें पटना जिला किसान सभा का अध्यक्ष बनाया गया .सन् 1980 ई० में जगन्नाथ मिश्र के प्रेस बिल का विरोध करते हुए वे पुनः गिरफ्तार हुए तथा भागलपुर जेल से 21 दिनों के बाद रिहा हुए.सन् 1990 के विधानसभा चुनाव में सीपीएम छोड़कर आईपीएफ उम्मीदवार का कृपानारायण सिंह को समर्थन किया तथा भाकपा-माले का सदस्य बन गए. कुछ समय के लिए आईपीएफ की राज्य कमिटी के सदस्य भी रहे. कुछ कारणवश सन् 2004 ई० में वे भाकपा – माले से अलग हो गए. लेकिन 2005 के विधानसभा चुनाव में पालीगंज में माले उम्मीदवार एन के नंदा को चुनाव में समर्थन किया एवं स्वतंत्र रूप से किसान संगठन चलाते रहे. सन् 2018 ई० में जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा का सदस्य बने,और फिलहाल इस दल में केन्द्रीय कार्य समिति का सदस्य, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं नीति निर्धारक कोर कमिटी के सदस्य थे।
पालीगंज से वेद प्रकाश की रिपोर्ट

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