Thursday, October 14, 2021
Homeबिहारपानी रे पानी...

पानी रे पानी…

जल ही जीवन है फिर भी यह रोगजनकों और विषैले तत्वों का सुलभ वाहक है | जिसका पेट के अंदर जाना बिमारियों और मौत को न्योता देना है|

डायरिया,हैज़ा,टाइफाईड,पीलिया,हेपेटाईटिस ए तथा इ जैसे दूषित जल से होने वाले मुख्य रोग हैं| कोविड 19 ने पानी की वर्तमान स्थिति को दरशा दिया है| पानी की परिशुद्धता बनी रहे इसपर दुनियाँ को गहन विचार करने की ज़रुरत है | कई रोग वाहक जो लसिका फाइलेरिया,डेंगू ,मलेरिया,जापानी इन्सेफलाइटिस जैसे रोगों को जल निकायों में प्रजनन कराते हैं | लिम्फेडेमा रोगियों {लसिका फाइलेरिया} के लिए रुग्णता प्रबंधन और विकलांगता की रोकथाम के लिए पानी की शुद्धता पर ध्यान रखना लाज़मी है |

भारत में आठ अत्यधिक प्रभावित राज्यों में लगभग 396.000 लिम्फेडेमा रोगी है|

अब हम एक नज़र डालते हैं पिने के पानी में भारत की उपलब्धि के ऊपर..

भारत सरकार ने अपने देश वासियों को पीने का पानी उपलब्ध करने में ज़बरदस्त प्रगति की है, WHOऔरUNICEF के संयुक्त मॉनिटरिंग कार्यक्रमों के तहत जलापूर्ति स्वच्छता के सतत विकास जल सेवाओं के तत्व जैसे गुणवत्ता भी सम्मिलित है| सुरक्षित पानी बिमारियों को रोकने और पोलियो जैसी बिमारियों के उन्मूलन की स्थिति बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण है| इसी सन्दर्भ में सरकार की जल जीवन मिशन योजना का ही परिणाम है कि जहां अगस्त 2019 में 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों में नल था वहीँ 2020 में 3.04 करोड़ नए कनेक्शन और जोड़े गए| अब देखना ये होगा कि भारत में प्रदूषित जल से होने वाली बिमारियों की रोकथाम की गति किस स्तर पर जा कर रूकती है |  

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments