Sunday, October 17, 2021
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निजीकरण लोककल्यंकारी राज्य और लोकतांत्रिक देश के लिए अभिशाप है :- भाई दिनेश।

जनता के द्वरा चुनी हुई सरकार अगर शिक्षा निजी हाथो मे देदे, अस्पताल का निजीकरण कर दे, रेल सेवा को निजी हाथो में देदे, बस सेवा निजी हाथो मे देदे, सिचाई तन्त्र को निजी हाथो मे देदे, पानी, हवा भी निजी हाथो मे देने के बारे सोचे, सरकारी संस्थान को सुब्यवस्थित करने के बजाय केवल बेचने के बारे मे सोचे वो सरकार को एक मिनट भी रहने का, अपने आप को देशभक्त कहने का , देश का प्रधान सेवक कहलाने का हक नही है।

खासकर बिहार प्रदेश की शिक्षा, चिकित्सा और सिचाई तन्त्र बहुत बुरा हाल है। जब तक शिक्षा और चिकित्सा सभी को मुफ्त नही मिलेगा तब तक प्रदेश और देश का समावेशी और सर्वागिण विकास नही हो सकता है।
आज जो शिक्षा की हालात है उससे चपरासी का बेटा चपरासी होगा, कलर्क का बेटा कलर्क होगा, इंजीनियर का बेटा इंजीनियर होगा, डाक्टर का बेटा होगा, एसपी का लड़का एसपी बनेगा, कलक्टर का बेटा कलक्टर बनेगा ,गरीब, किसान का बेटा गरीब किसान ही रह जायेगा इस लिए सभी के लिए एक समान शिक्षा, मुफ्त शिक्षा की नीति बनाने की जरूरत है। आखिर बिहार का एक भी SP, DM, मंत्री, MLA, MP, डाक्टर, इंजीनियर का बेटा बिहार मे क्यो नही पढ़ रहा है?
स्वयम बिहार के गरीब, मजदूर, किसान विचार करे,
स्कूल, अस्पताल, सिचाई के विषय चर्चा करे तब ही आपका विकास होगा। 20 दिन शराब, मुर्गा, मिट, पैसा पर, 100 गाड़ी की काफिला पर, दस बन्दुक देखकर , पाच किलो चावल- गेहूँ पर, गाव के मंदिर निर्माण मे कोई दस- बीस हजार रुपया देदिया उस पर, नम्नेशन मे स्कार्पियो भेज दिया उस पर वोट करेंगे तो कभी वो आपके स्कूल, अस्पताल के विषय मे नही सोचेगा,
वो कभी आप पर हो रहे पुलिस जुल्म, अत्याचार का विरोध नही करेगा, वो कभी थाना, ब्लॉक, अनुमंडल और जिला कार्यालय मे हो रहे भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ नही उठायेगा, वो कभी आपके नहर मे पानी के लिए नही बोलेंगे, वो कभी आपके गाव के बिजली, सड़क की समस्या पर नही बोलेंगे, वो कभी गाव- गाव मे शराब जो बिक रहा है जिससे घर, समाज, परिवार, भाईचारा, आपसी सदभावना बर्बाद हो रहा है उस पर नही बोलेंगे, वो कभी अपराधी, अन्यायी, अत्याचारी के विरुद्ध आवाज़ नही उठा सकता है।  आप स्वयम लोकतन्त्र के मालिक है आप अपने लिए स्वयम विचार करे। आज देश का सरकारी संस्थान, सम्पति को बेचा जा रहा है आप चुप है, आपका यह चुपी आपको ही एक दिन बहुत महगा पड़ेगा। आप स्वयम विचार करे की आज निजी अस्पताल और निजी स्कूल मे आप जा रहे है तो कैसा महसूस कर रहे है, कितना आप सक्षम होते है अपना ईलाज कराने मे और अपने बेटे को पढ़ाने मे, जब हर संस्थान निजी हाथो मे चला जायेगा तब क्या होगा इस पर विचार करे, निजीकरण के विरुद्ध हर गाव से आवाज़ उठाये।
अपना मतदान अच्छे व्यक्ति के पक्ष मे करे।

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