Monday, October 11, 2021
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जोरदार बारिश ने खोल दी नगर परिषद के नाली उड़ाहीं के दावों की असलियत।

तकरीबन 1 फीट तक जमा रहा सड़कों पे पानी नगर परिषद के कार्यों की खुल गई पोल।

बक्सर: बीती रात हुई जोरदार बारिश ने नगर के कई इलाकों को जलमग्न करते हुए नगर परिषद के के सौ समय नाली उड़ाही के दावों की असलियत दिखा दी है. पूरे नगर के विभिन्न मुहल्लों में जलजमाव साफ देखा जा सकता है सड़कों पर तकरीबन 1 फीट तक पानी जमा हो गया है.  उधर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी प्रेम स्वरूपम के ट्रेनिंग में चले जाने के बाद बक्सर नगर परिषद के कमान डुमराँव नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के हाथों में चली आई है. ऐसे में जलजमाव के बाद उनकी चिंता इतनी बढ़ गई है कि उन्होंने फोन तक उठाना बंद कर दिया है. वह लगातार यह चिंतन और मनन कर रहे हैं कि किस प्रकार लोगों को जलजमाव से निजात दिलाया जाए? इसी क्रम में वह बाजार समिति रोड के समीप नेहरू स्मारक स्कूल के पास नाले का जायजा लेते नजर आए. 
सूचना सह जनसंपर्क पदाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि जिला पदाधिकारी के द्वारा कार्यपालक पदाधिकारी को यह सख्त निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी हाल में नगर में जलजमाव की स्थिति ना बनने दें.
हालांकि, सूचना सह जनसंपर्क पदाधिकारी कुछ भी कहे लेकिन, जलजमाव पूरे नगर में व्याप्त है. वार्ड संख्या 3 में मुख्य पार्षद माया देवी के घर के समीप जलजमाव व्याप्त है.मुसाफिर गंज वार्ड संख्या 9, 10 सोहनी पट्टी वार्ड संख्या 21 व 33, श्रीचंद मंदिर के समीप मुख्य सड़क पांडेय पट्टी के इलाके के साथ-साथ नगर के अलग-अलग वार्डों के कई निचले इलाके डूबे हुए हैं. वार्ड संख्या 9 के वार्ड पार्षद शशि गुप्ता बताते हैं कि अचानक हुई बारिश के कारण यह स्थिति पैदा हुई है हालांकि, उनके वार्ड के नाले पूरी तरह साफ है और पानी जल्दी निकल जाएगा. समाहरणालय के समीप अंडर ग्राउंड नुमा खतरे में दुकान चलाने वाले लोगों की दुकानों में पानी लग गया है. मोबाइल, मोटर पार्ट्स तथा मिठाई की दुकान में घुसे पानी के कारण काफी नुकसान ही हुआ है.
उधर, व्यवहार न्यायालय में अधिवक्ता हर साल की भांति इस साल भी जलजमाव के साथ प्रैक्टिस करने को मजबूर है. अधिवक्ता बरमेश्वर सिंह बताते हैं कि अधिवक्ता न्यायालय तथा वादकारियों के बीच की कड़ी होता है. ऐसे में उसकी अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है लेकिन, अधिवक्ताओं के प्रति प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि, हर साल जलजमाव होता है और उसका कोई निदान नहीं निकाला जाता. अधिवक्ता राजू कुमार तथा महेंद्र कुमार चौबे का कहना है कि ना तो अधिवक्ता संघ और ना ही न्यायिक पदाधिकारी इस पर कोई संज्ञान लेते हैं ऐसे में स्थिति बेहद नारकीय बनी हुई है.

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