Tuesday, October 12, 2021
Homeबिहारअपने दम पर समाज़ को नई दिशा प्रदान करने में सक्षम हैं...

अपने दम पर समाज़ को नई दिशा प्रदान करने में सक्षम हैं बेटियां

भारत में हम अगर आधी आबादी की बात करें तो पहले की अपेक्षा काफी सुधार आई है। पहले महिलाओं को घर से बाहर निकल कर उच्च शिक्षा पाना ,जॉब करना ये सब एक स्वप्न सा दीखता था।

और शायद यही कारण रहा कि हमारे देश और राज्यों का बिकास भी धीमा पड़ गया था। अगर एक बेटी शिक्षित होती है तो वो अपना दोनों कुलों यानि अपना मैके और अपना ससुराल दोनों को शिक्षित और उच्च सोंच प्रदान कर सकती है।

तभी देश और राज्य की रूढ़िवादिता ख़त्म होगी और देश का विकास संभव हो सकेगा। लोगो में बेटियों के प्रति नकारात्मक सोंच इस कदर हावि था कि बेटियों के गर्भ में आते हीं माता पिता द्वारा इसकी मृत्यु तय कर दी जाती थी |

अंधविश्वास इस तरह था कि वंश को आगे बढ़ाने के लिए बेटा चाहिए। बुढ़ापा में सहारा के लिए बेटा चाहिए। और कुछ लोगों को तो मुक्ति मिलना मुश्किल हो जाता था,उन्हें नरक में जगह मिलने का भय सताता रहता था|

शायद ऐसे ही कई कारण है जिसकी वजह से बेटियां मारी गयी कभी गर्भ में तो कभी ससुराल में। समाज़ के लिए बहुत बड़ी समस्या जिसे राज्य और केंद्र सरकार कि संयुक्त सकारात्मक सोंच कि वज़ह से इस मसले का निदान निकला गया |

जैसे..अगर बात बिहार की करें तो सीएम  नीतीश कुमार ने भी अपने राज्य में बेटी की स्थिति सुधारने की पूरी कोशिश की है।

मुफ़्त शिक्षा ,स्कूल जाने के लिए साइकिल, मैट्रिक,इंटर पास होने पर स्कोलेरशिप इससे आगे नौकरी में भी 35% का आरक्षण कर दिया गया है।

केंद्र सरकार ने भी महिलाओं की स्थिति को सुधारने उनका जीवन स्तर उठाने के लिए “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” अभियान शुरू किया| इस योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से प्रधान मंत्री द्वारा हुई थी।

इस योजना के अंतर्गत CSR (शिशु लिंगानुपात) जीवन के निरंतरता और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पे विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है।

बालिकाओं के अस्तित्व और संरक्षण को भी इस योजना में सुनिश्चित किया जा रहा है।

“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” अभियान का असर अब दिखने लगा।

पिछले 6 साल में लिंगानुपात में सुधार आया है। 2014-15 में 1000 बालकों में बालिकाओं की संख्या 918 थी ,जो कि 2019-20 में बढ़कर 934 हो गई है। लिंगानुपात में ख़राब स्थिति वाले हरियाणा ,चंडीगढ़ ,पंजाब ,उत्तरप्रदेश और हिमाचल प्रदेश आदि में अच्छा सुधार आया है।

हरियाणा में 876 से बढ़कर 924 ,चंडीगढ़ में 874 से बढ़ कर 935 ,उत्तरप्रदेश में 885 से 928 ,पंजाब में 892 से 920 से बढ़कर 948 हो गई है।

इन आंकड़ों को बढ़ाने में केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने सहयोग किया है। बेटियाँ शिक्षित हुई तो समाज़ के नज़ारे बदल गए, लोगो के सोचने का तरीका बदल गया | अब बेटियां बेटों से बहुत आगे निकल चुकी हैं और अपने दम पर समाज़ को एक नई दिशा प्रदान करने में सक्षम हैं |

कंटेंट डेस्क  

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments